Some lines about tantra..
कुछ लोग पूछ रहे थे कि तंत्र क्या है
तंत्र के आदि गुरु भगवान शिव माने जाते हैं और वे वास्तव में देवों के देव महादेव हैं। तंत्र शास्त्र का आधार यही है कि व्यक्ति का ब्रह्म से साक्षात्कार हो जाये और उसका कुण्डलिनी जागरण हो तथा तृतीय नेत्र (Third Eye) एवं सहसार जाग्रत हो। भगवान शिव ने प्रथम बार अपना तीसरा नेत्र खोला था और कामदेव को भस्म किया था। *तृर्तीय नेत्र जागरण दिवस* और तांत्रिक विशेष साधना सम्पन्न करते हैं जिससे उन्हें भगवान शिव के तीसरे नेत्र से निकली हुई ज्वाला का आनन्द मिल सके और वे उस अग्नि ऊर्जा को ग्रहण कर अपने भीतर छाये हुए *राग, द्वेष, काम, क्रोध, मोह-माया* के बीज को पूर्ण रूप से समाप्त कर सकें।
क्योंकि काम शिव के तृतीय नेत्र से भस्म होकर पूरे संसार में अदृश्य रूप में व्यापत हो गया। इस कारण उसे अपने भीतर स्थापित कर देने की क्रिया साधना से प्रारम्भ की जाती है। सौन्दर्य, आकर्षण, वशीकरण, सम्मोहन, उच्चाटन आदि से सम्बन्धित विशेष साधनाएं सम्पन्न की जाती हैं। शत्रु बाधा निवारण के लिये, शत्रु को पूर्ण रूप से भस्म कर उसे राख बना देना अर्थात् अपने जीवन की बाधाओं को पूर्ण रूप से नष्ट कर देने की साधनाएं भी प्रारम्भ की जा सकती हैं तथा इन साधनाओं में विशेष सफलता शीघ्र प्राप्त होती है।
काम जीवन का शत्रु नहीं है क्योंकि संसार में जन्म लिया है तो मोह-माया , इच्छा, आकांक्षा यह सभी स्थितियां सदैव विद्यमान रहेंगी ही और इन सब का स्वरूप काम ही है। लेकिन यह काम इतना ही जाग्रत रहना चाहिए कि मनुष्य के भीतर स्थापित शिव, अपने सहस्रार को जाग्रत कर अपनी बुद्धि से इन्हें भस्म करने की क्षमता रखता हो।
जो भी लोग तंत्र को सम्भोग से जोड़ कर देख रहे है वो लोग अपना minds clear रखे,
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Amar Singh thakur
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Some lines about tantra..
Tantra Nectar
skool.com/tantra-nectar
It is a school of awakening where we transform life energy into love, creativity, and inner power — a journey from longing to freedom
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